Citizenship Amendment Bill Kya hai - नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 क्या है?

देश भर में मचे बवाल के बीच बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 राज्यसभा में पारित हो गया, नागरिकता संशोधन विधेयक ( Citizenship Amendment Bill ) 2019 को 9 दिसम्बर 2019 को लोकसभा ने पास कर दिया है, राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 125 जबकि विपक्ष में 99 वोट पड़े. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में विधेयक को पेश किया, जिस पर करीब 6 घंटे की बहस के बाद अमित शाह ने सदन में विधेयक से संबंधित जवाब दिए. 

इस बिल का उद्येश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आये 6 समुदायों (हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी) के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है. इन 6 समुदायों में मुस्लिम समुदाय को शामिल ना किये जाने पर कई राजनीतिक पार्टियाँ इसका विरोध कर रहीं हैं.

भारत एक सेक्युलर, संप्रभुता संपन्न और शांतिप्रिय देश है. शायद यह पूरी दुनिया में ‘विविधता में एकता’ का परिचय करने वाला यह अकेला देश है. शायद यही कारण है कि कई देशों के नागरिक भारत की नागरिकता पाने को आतुर रहते हैं.

# नागरिकता संशोधन विधेयक 1955 क्या कहता है? (Citizenship Amendment Bill 1955).
नागरिकता अधिनियम 1955 भारत की नागरिकता प्राप्त करने की 5 शर्तों को बताता है, 
जैसे-  1. जन्म, 
         2. वंशानुगत, 
         3. पंजीकरण, 
         4. प्राकृतिक 

एवं क्षेत्र समविष्ट करने के आधार पर. इस अधिनियम में 7 बार संशोधन किया जा चुका है. नागरिकता हासिल करने के लिए व्यक्ति को कम से कम 11 वर्ष भारत में रहना अनिवार्य था, जो कि बाद में घटाकर 6 वर्ष कर दिया गया था, लेकिन नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 में इस अवधि को घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है.

# बिल पर किस बात का विरोध हो रहा है? 
इस बिल को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा. विपक्ष का मुख्य विरोध धर्म को लेकर है. नए संशोधन बिल में मुस्लिमों को छोड़कर अन्य धर्मों के लोगों को आसानी से नागरिकता देने का फैसला किया गया है. विपक्ष इसी बात को उठा रहा है और मोदी सरकार के इस फैसले को धर्म के आधार पर बांटने वाला बता रहा है.


नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत किसी व्यक्ति को OCI ( Overseas Citizenship ) कार्ड दिया जा सकता  है, यदि वह भारतीय मूल का है (जैसे, भारत के पूर्व नागरिक या उनके वंशज या भारतीय मूल के व्यक्ति के जीवनसाथी). अब 2019 का एक्ट OCI ( Overseas Citizenship ) कार्ड को यह सुविधा देता है कि वे भारत में यात्रा करने, देश में काम करने और अध्ययन करने के अधिकारी हैं.
नागरिकता अधिनियम 2016 में यह प्रावधान था कि किसी OCI ( Overseas Citizenship ) कार्ड धारक का कार्ड इन 5 कारणों से रद्द किया जा सकता है.

1. धोखाधड़ी से रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना, 
2. संविधान के प्रति अरुचि दिखाना, 
3. युद्ध के दौरान शत्रु से दोस्ती बढ़ाना, 
4. भारत की संप्रभुता, 
5. राज्य या सार्वजनिक हित की सुरक्षा से खिलवाड़ करता है, या OCI कार्ड के रजिस्ट्रेशन मिलने के 5 सालों के भीतर उसे दो साल या अधिक कारावास की सजा सुनाई गई है.

अब नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 इस एक्ट में परिवर्तन कर देगा और इसमें यह प्रावधान जोड़ा गया है, कि यदि कोई OCI ( Overseas Citizenship ) कार्ड धारक, भारत सरकार द्वारा बनाये गये किसी कानून का उल्लंघन करता है तो उसका OCI ( Overseas Citizenship ) कार्ड रद्द किया जा सकता है.

नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 कहता है, कि भारत की नागरिकता प्राप्त करने पर 

1. अवैध प्रवासियों को प्रवेश की तारीख (31 दिसंबर, 2014 से पहले) से भारत का नागरिक माना जाएगा, 
2. उनके अवैध प्रवास के संबंध में उनके खिलाफ सभी कानूनी कार्यवाही बंद हो जाएगी.
हालाँकि असम, मेघालय, मिजोरम, या त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों के लिए नागरिकता पर प्रावधान लागू नहीं होंगे.

तो आप समझ गए होंगे " नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019. के कुछ प्रावधान जो कि 3 देशों के 6 समुदायों के लोगों को भारत की नागरिकता देते हैं.

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