भरतपुरा ब्रिटिश काल में राजकीय अस्पताल खंडहर में हुई तब्दील जानिए पूरा मामला

पालीगंज दुल्हिन बाजार प्रखंड भरतपुरा गाँव जो पालीगंज से भरतपुरा की दुरी 7.2 किलोमिटर की दुरी पर है, 1912 में स्थापित एक ब्रिटिश कालीन राजकीय अस्पताल की जोकी आज वह वषों से राज्य सरकार के उपेक्षा के कारण खंडहर में तब्दील हो चुकी है.

 



जानकारी के अनुसार वहाँ के लोगों ने बताया कि यह राजकीय अस्पताल की स्थापना अंग्रेजी हुकूमत के दौरान यहाँ जमींदारों ने अपनी जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं को ख्याल में रखते हुए ऐतिहासिक गोपालनारायन सिह सार्वजिक पुस्तकालय सह संग्रहालय के साथ साथ 1912 मे स्थापना किया था.


उस समय यह राजकीय अस्पताल की दर्जा प्राप्त था, लगभग 7 एकड़ में फैले यह अस्पताल में डॉक्टरों की ,नर्सों ,और अन्य कर्मचारियों को रहने की आवासीय सुविधाएं समेत अपने समय की अत्यधुनिक उपकरणों से लैस थी, इस अस्पताल में ईलाज के लिए प्रतिदिन सैंकडो लोग लगभग 20 किलोमीटर की दूरी के लगभग 50 गाँवो से आते थे.


इसकी अपनी एक अलग और विशेष पहचान थी, प्रतिदिन अच्छे डॉक्टरों की उपलब्धता रहती थी, यह सिलसिला आजादी के बाद भी 1980 के दशक तक बदस्तूर जारी रहा, लोग बताते है, कि 80 के बाद से यहाँ के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कारण इस अस्पताल को डिमोशन करके इसे 6 बेड की अति स्वास्थ्य केंद्र बना दिया गया, इसके बाद यहाँ पर हप्ते में एक दिन डॉक्टरों की तैनाती हो गई.


फिर धीरे धीरे यह अस्पताल की दिन पर दिन दुर्दशा बढ़ती गई, लगभग बन्दी के कगार पर खड़ी यहाँ विगत कई सालों से सिर्फ एक नाम के लिए आयुष डॉक्टरों के तैनाती है, जो कभी आता कभी नही आता, यह अस्पताल अब सिर्फ हप्ते में एक दिन आयुष डॉक्टर के सहारे पर चल रही है.डॉक्टरों ,नर्सों और कर्मचारियों के बने आवास आज पूरी तरह से ध्वस्त हो खंडहर में तब्दील हो चुकी है.


पूर्व मुखिया दयानंद शर्मा और भाजपा के नेता शिवेंद्र धारी सिंह समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे अस्पताल पूरे अनुमंडल क्षेत्र में नही थी, यह पालीगंज का उग्रवाद प्रभावित रहा है, उसके कारण भी इसकी यह आज दयनीय स्थिति हुई है, इसके आसपास के 4 दर्जनों ऐसे गांव है, जिन्हें इलाज के 10 से 15 किलोमीटर तक पालीगंज अनुमंडल अस्पताल या दुल्हिन बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है, जहाँ जाने में कई घण्टे लग जाते है,

अस्पताल के संस्थापक रहे भरतपुरा जमींदार घरानों के तीसरी पीढ़ी के उत्तराधिकारी और भाजपा नेता व राज्य किसान मोर्चा के कार्यकारणी सदस्य श्री शिवेंद्र धारी सिह ने बताया कि हमलोग स्थानीय सांसद सह केंद्रीय मंत्री ग्रामीण विकास राज्यमंत्री रामकृपाल यादव के साथ साथ विभगिय सचिव और मुख्य सचिव के पास भी इसके जल्द से जल्द जीर्णोद्धार और कायकल्प की गुहार लगा चुके है,लेकिन इस दिशा में अबतक कोई करवाई नही हो सकी है.



Journalist : Amlesh
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