2030 तक एचआईवी को खत्म करने का लक्ष्य

एड्स एक घातक बीमारी है, लेकिन हमारा जो समाज है, वो इसे और घातक बना देता है, हमारे समाज में एड्स के मरीजों को हेय दृष्टि से देखा जाता है, और उनके साथ बुरा बर्ताव करता है,

2030 तक एचआईवी को खत्म करने का लक्ष्य
जिससे एड्स पीड़ितों का जीवन और अधिक घातक हो जाता है, जिस कारण से भारत सरकार इस साल एड्स मरीजों के लिए एक विधेयक लाई है, जिसका लक्ष्य है, 2030 तक एचआईवी को खत्म करना और एड्स मरीजों को समाज में बराबरी का हक दिलाना, भारत सरकार ने अक्टूबर, 2016 में एचआईवी और एड्स ( रोकथाम एवं नियंत्रण ) संशोधन विधेयक को मंजूरी दी, वर्तमान में देश में लगभग 21 लाख लोग एचआईवी पीड़ित हैं.

इसके कारण ये पूरे विश्व में एड्स के मामले में तीसरा स्थान रखता है, पहले स्थान पर दक्षिण अफ्रीका और दूसरे स्थान पर नाइजीरिया है, इस महामारी को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है, और ये एचआईवी और एड्स ( रोकथाम एवं नियंत्रण ) विधेयक, 2014 में निम्न संशोधन किए हैं.
  • एचआईवी और एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ किए जाने वाले हर तरह के भेदभाव को प्रतिबंधित किया गया है.
  •  उन प्रकाशकों को रोकना जो एचआईवी और एड्स पीड़ित व्यक्ति के बारे में घृणा फैलाते हैं.
  •  जानकारी नहीं की जाएगी सार्वजनिक: एचआईवी और एड्स पीड़ित व्यक्ति से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी को पीड़ित की सहमति या न्यायालय के आदेश के बिना सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, इससे अलावा अगर कोई पीड़ित किसी कार्यालय में काम करता है, तो उसे अपनी बीमारी के बारे में ना बताने की पूरी छूट मिली हुई है.
  • 12 से 18 वर्ष के आयु के एचआईवी या एड्स पीड़ित व्यक्ति जिसमें इस रोग से संबंधित व्यवहार एवं देखभाल की समझ है, वह अपने से छोटे आयु के ( 18 वर्ष से कम ) सहोदरों के संरक्षक हो सकेंगे
  • परिवार के साथ रहने का कानूनी अधिकार : एड्स पीड़ितों के साथ परिवार वाले भी कई बार अच्छा व्यवहार नहीं करते और उनका बहिष्कार कर देते हैं, लेकिन इस विधेयक के आने के बाद 18 वर्ष से कम आयु के इस रोग से ग्रसित या प्रभावित व्यक्ति को साझा परिवार में रहने का अधिकार है.
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