क्या आप जानते है, मध्यकाल में अपराधी को सजा देने का तरीका - Most Brutal Torture Techniques

क्या आप जानते है, इंसानो के साथ होता था, टॉर्चर और क्रूर बर्ताव तब की बात है, जब 5वी शताब्दी का दौर में भी क्रूरता और गुलामी की याद किया जाता था, काफी लोग गरीबी में जी रहे थे, लोगो ने राजा - महाराजा के यहाँ गुलामी करके अपना पेट भरते थे, अगर कभी गलती या क्राइम करने वाले के पास पैसे न होने के कारण उनके हाथ,पैर,और सर काट दिये जाते थे.

आइये हम आपको बताते है, पहले के लोग कैसे टॉर्चर और क्रूर करते थे


लकड़ी को नेकड कर घोड़े पे बैठा दिया जाता था



लकड़ी को नेकड कर घोड़े पे बैठा दिया जाता था, और गलती करने वालो को नेकेड कर घोड़े जैसे स्ट्रक्चर पर बिठा दिया जाता था और साथ ही दोनों पैरों में वजन लटका दिया जाता थे, इससे शरीर के धीरे-धीरे आधे हिस्से में बंट जाता था.

गलती हो जाने पर शरीर को आधा कर दिया जाता था


गलती करने वालो को पैर बांध कर और उल्टा लटका दिया जाता था, और शरीर को बीचो-बिच काट दिया जाता था. 



गलती करने पर कील वाली कुर्सी पर बांध दिए जाते थे, लोगो को

टॉर्चर और क्रूर करने के लिए 1800 तक यूरोप में इस्तेमाल किया जाता था, इस कुर्सी के हर हिस्से में लोहे के कील लगी हुई रहती थी, और अपराधी को इस कुर्सी पर बांध दिया जाता था, और येही नहीं लोहे के कुर्सी के निचे आग भी जाल देते थे. 

गिलोटिन डिवाइस से अपराधी का सर अलग कर दिए जाते थे.

अपराधी को गिलोटिन डिवाइस से सिर को अलग कर दिए जाते थे.


पिरामिड की कुर्सी पर बैठा कर अपराधी को टॉर्चर करना

क्या आप जानते है, अपराधी को पिरामिड की कुर्सी के पॉइंट पर बैठा कर उसके शरीर को अलग - अलग कर दिए जाते थे, और हिस्सों को रस्सियों से बांधकर हिलाया जाता था, ऐसे में अपराधी की प्राइवेट पार्ट जख्मी हो जाते थे, और मांसपेशियों के फटने से कई बार इन्फेक्शन के कारण इंसान की जान चली जाती थी.
 
अपराधी को सूली पर चढ़ाया जाता था

आपराधियो को सजा देना आदम कल से ही होता चल रहा है, और किसी किसी देश आज भी होती है, जीसस क्राइस्ट के लिए इस्तेमाल होने के नाते इसके बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं,लकड़ी के बने क्रॉस पर कैदियों को दोनों हाथ-पैर बाँधकर कीलें ठोक दी जाती हैं, अपराधी को तब - तक लटका कर छोड़ दिया जाता था,जब तक जान न निकल जाये,

गर्दन में मेटल के कांटेदार फ्रेम से अपराधी को बांधा जाता था

अपराधी को ये सजा देना दर्दनाक से काम नहीं है, इसमें गर्दन में मेटल के कांटेदार फ्रेम से अपराधी को बांधा जाता था, इसमें न खा पते और न गर्दन को हिला पाते,
Labels:
What do you say ?

Post a comment

Please share your thoughts...

Note: only a member of this blog may post a comment.

About Author

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.