राज्य के सभी जनवितरण प्रणाली के दुकानों ( पीडीएस ) अब पंचायत समिति करेंगी निगरानी खाद उपभोक्ता मंत्री मदन साहनी की घोषणा से अब यह बात साफ हो चुकी है, कि राज्य सरकार डीलरों और पदाधिकारियो की मनमाने व्यवहार की मिल रही शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए कमर कस चुकी है, यह एक स्वागत योग्य फैसला है, इसकी प्रभाव दूरगामी होगी, क्योंकि डीलरों के विरुद्ध वर्षो से मिलती रही लगातार शिकायत पर पदाधिकारियो की काली कमाई की पर रोक लगाने का सही समय आ गया है, यह राज्य सरकार का बहुत गम्भीर निर्णय है!

 काली कमाई की पर रोक लगाने का सही समय आ गया है : पालीगंज  

आम उपभोक्ता डीलर की शिकायत लेकर एमओ और एसडीओं के पास लेकर जाते है, डीलरों पर करवाई के बदले उलटे यह एक दुधारू गाय हो थे डीलर जिसको एमओ और एसडीओं ,आम उपभोक्ताओं को करवाई के दिखावे कर उन्हें आँख में धूल झोकते हुए उपभोक्ताओं को ही मूर्ख बनाते रहे है,

कल देर रात दुल्हिन बाजार पुलिस ने गुप्त सूचना पर कालाबाजारी के लिए पाली से मसौढ़ी ले जाए जा रहे एक पिकउप पर 11 ड्रम 2100 लीटर किरासन तेल को पकड़ कर बड़ी सफलता हासिल किया यह किसकी थी, और कहाँ जा रहे थे तेल, क्या पुलिस सही लोगो तक पहुच पाएगी ?


ऊपर से तीन लीटर किराशन तेल नीचे आते आते 2 लीटर और राशन 5 kg के बजाय तीन kg हो जाते है,ये बीच के एक लीटर किरासन 2 kg राशन कहाँ जाता है,जब इसकी शिकायत एसडीओं और एमओ से की तो वो लोग कहते ,जिला से ही कम आवंटन मिला है ।

जिसका जीता जागता उदाहरण है, पालीगंज अनुमंडल जहाँ जुलाई माह में पाली प्रखंड के लगभग 225 डीलरों की किरासन का आवंटन हो रहा था, जिसमें 200 डीलर ने 25 जुलाई तक अपने कोटे की आवंटित राशन किराशन उठा कर बाट दिया, बचे हुए 25 डीलरों ने जब अपने आवंटित कोटे की राशन किरासन उठाने लगे तब उन्हें आधी मिला जब डीलरों ने इस बाबत पूछा तो एमओ ऑफिस ने बताया कि ऊपर से अचानक आदेश आ गया , आधी कोटे ही देने है, ये सभी डीलर उस महीने राशन किरासन नहीँ बाटे यह 15 अगस्त के खर्चे के लिए काटा गया 


इस पर कई पंचायतों के लोगो ने शिकायत किया , इस बार सभी डीलरों को पूरा आवंटन मिला था,ये बात कुछ हजम नहीँ हुई की कुछ ही लोगो का क्यों कटा गया, जिसमें एक तथ्य सामने उभर कर आया वो यह की हर बार जानबूझकर महीने के आखिरी में डीलर उठाते है, पदाधिकारियो की मिली भगत से उठी आवंटन अगले महीने के शुरुवात में बटाते है,आने वाले इस महीने के राशन को उठाकर ऊपर ऊपर कालाबाजारी के लिए बेच देते है,

एक तय रणनीति के वजह से डीलरों और पदाधिकारियो ने मिलकर हर माह औसतन 25 डीलरों की तय रहती है, उपभोताओं कि हक को लूटने की सभी एक सुनिश्चित साजिस के तहत बारी बारी से लूट करते है,यह काम पदाधिकारियो की सहमति से होती है, यह मेरी दृढ विश्लेषण है,

 
जब पूरी छानबीन किया गया तो नतीजा सामने आया बड़े सफेद ढंग से आम उपभोक्ताओं की हक को लूटने की साजिश उभरकर सामने आए, इसमें सबकी कमीशन की राशि तय रहती है,