क्या आप जानते है,उल्लार सूर्य मंदिर की पौराणिक कथा : पालीगंज

उल्लार्क : के नाम से नहीं,हम आज " उल्लार " के नाम से जानते है,पालीगंज अनुमण्डल के दुल्हिन बाजार प्रखंड के देव नगरी उल्लार में अवस्थित है,यह भगवान भास्कर की पवित्र नगरी उल्लार 12 सूर्य उपासना शक्ति पीठो में से एक है,उल्लार की इतिहास इतिहासकारों,जानकारों बड़े बुजुर्गों और वर्तमान मठ महन्थ श्री अवध बिहारी दास जी का मत है, द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पुत्र राजा शाम्ब को कुष्ठ व्याधि महर्षि गर्ग ऋषि के श्राप से हो गई थी,शाम्ब एक समय वे अपने साथ कई सुंदर कन्याओं के साथ एक सरोवर में विहार कर रहे थे, की उसी रास्ते महर्षि गर्ग गुजर रहे थे, जिन्हें देखते हुए भी राजा शाम्ब ने महर्षि का अनदेखा करते हुए सरोवर में अपने धुन में मग्न रहे और इसको महर्षि ने अपना अपमान मानते हुए, क्रोद्धित हो शाम्ब को कुष्ठ व्याधि का श्राप दे दिया.


कुष्ठ रोग से ग्रषित हो राजा काफी कष्टमय और दुखी जीवन जीने लगे,इसको उपचार के लिए लाख प्रयत्न किया परन्तु सभी निष्फल रहे,फिर थक हार के उन्होंने कई ऋषियों महर्षियों के शरण में इसकी उपाय की याचना और अपनी गलती की क्षमा मांगते हुए, उन्हें प्रसन्न किया, इसके बाद महर्षियों ने एक उपाय बताया जिसमें उन्हें भगवान भास्कर की विभिन्न स्वरूपो की 12 मंदिर और तालाब खुदवा कर लगातार 12 साल बारह जगहों पर सूर्य उपासना करने की सुझाव दिया.


उसके बाद राजा शाम्ब ने 12 सूर्य शक्ति पीठों स्थापना करते सूर्य आराधना कर अपने कुष्ठ व्याधि से मुक्ति पाई थी. जिसमें 

  1. उल्लार्क          : पालीगंज
  2. देवार्क            : देव 
  3. पुण्यार्क           : पंडारक
  4. औंगार्क           : औगरी
  5. लोलार्क           : काशी
  6. कोणार्क          : उड़ीसा
  7. मार्कण्डेयॉर्क      : कन्दाहा
  8. बालार्क           :बड़गाँव 
  9. चानार्क
  10. कटलार्क          : अल्मोड़ा
  11. मोढेयार्क          : गुजरात आदित्यार्क -अब पाकिस्तान में है. 

इसके बाद मुगल कालीन दौर में औरंगजेब ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था.महन्थ श्री अवध बिहारी दास की बताते है,1948 में एक परम् हंसः संत अलबेला बाबा का आगमन के बाद उन्होंने ही इसकी फिर से उसी जगह पर आस-पास के गाँवो के लोगो के सहयोग से इसकी जिर्णोउद्धार करवाया था,वहीँ मंदिर अभी वर्तमान स्वरूप में अभी विराजमान है,जिसमें बहुमूल्य अष्टधातु की दुर्लभतम मूर्तिया भगवान भास्कर की स्थापित है.

  



इसकी पौराणिक महत्ता है,जो कोई भी श्राद्धलु भक्तों अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु मन्नते मानते है,उनकी अवश्य सभी मनोकामना भगवान भास्कर और छठी मईया पूर्ण करते है,जिसका जीता जागता प्रमाण की हर वर्ष लाखों श्रद्धालुयों भक्तों की भीड़ उमड़ती जो अपनी मन्नते पूरी होने के बाद इस दरबार में अपनी मथ्था टेकने और छठ व्रत कर अपनी मनिता उतारते है.



एक खास और भी है, यहाँ की ऐतिहासिक परंपरा रही है,कि कोई दम्पति को जब संतान नहीँ होती है,तो यहाँ मन्नते मानते है,जब संतान और अन्य मनोकामना पूरी होने के बाद माँ अपनी आँचल पर नेटुवा की नाच नचवा कर अपनी मन्नते उतारती है,आज भी यहाँ देखी जा सकती है.

हर वर्ष इस ऐतिहासिक " उल्लार सूर्य मंदिर " में छठ व्रतियों और श्राद्धलु भक्तों की लाखों की संख्या में भड़ती अपार भीड़ पालीगंज अनुमण्डल के दुल्हिन बाजार प्रखंड के देव नगरी उल्लार में अवस्थित है, इस साल अनुमान के अनुसार लगभग 5 लाख से ऊपर श्रद्धलुओं की आने की उम्मीदे अनुमण्डल प्रशासन को है,जिसे नियंत्रित करने के लिए जिला और अनुमण्डल ने सुरक्षा व्यवस्था ,व्रतियों की सुविधाओं की व्यपाक इंतजाम किया है,किसी भी तरह की प्रशासनिक मदद के लिए कंट्रोल रूम की भी व्यवस्था किया जहाँ किसी भी तरह की सहायता तत्काल लिया जा सकता है.


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